Monday, October 10, 2011

तुमको भूल न पाएंगे हम,ऐसा लगता है.!!

आज सुबह..जैसे ही कंप्यूटर खोला,तो न्यूज़ मिली की जगजीत सिंह नहीं रहे..तब से शॉक में हूँ..
मन सीधे वहां पहुंचा,जहाँ उनसे पहली बार रूबरू हुई थी..9th क्लास में थी मैं..तब से आज तक जगजीत मेरे बहुत करीब रहे...कितने ही सफ़र मैंने अपने फोन के ग़ज़ल फोल्डर को रिपीट पर लगा कर बिताये हैं..जब भी घर पर अकेली रही,दिन भर ग़ज़लें चलती थीं..जगजीत सिंह जी  के बारे में जितना जाना,उतना ही उनकी आवाज़ में डूबती गयी..अभी कुछ दिन पहले उनका एक पुराना इंटरव्यू  पढ़ा था..
"जैसे कभी शिवजी ने गरल पी कर अपने कंठ में रोक लिया था,उसी तरह जगजीत सिंह ने भी अपने जीवन का सारा दुःख,सारा दर्द अपने कंठ में ही रोक लिया है.."
सच..उनकी आवाज़ की गहराई..सीधे दिल को छूती है..
अभी भी,ग़ज़ल फोल्डर में जगजीत गुनगुना रहे हैं..

"जिंदगी..इक सुलगती सी..चिता है..साहिर..
सुलगती सी चिताssss
शोला बनती हैं,न ये बुझ के धुआं होती है.."


जगजीत सिंह जी को श्रद्घांजलि..

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