बहुत दिन बाद लिख रहे हैं,कुछ दिन पहले ही फिर से शुरू किया था..
और जो लिखा,उस से ज़िंदगी ने यू-टर्न ले लियाकुछ ये है वो...
‘एट ए टच ऑफ लव, एवरीवन बिकम्स ए पोएट्’’
- प्लेटो
प्लेटो के कही हुई बात हर ज़माने के प्रेमियों के लिए बिलकुल सटीक है, सभी इससे सरोकार रखते हैं; पर इमरोज कुछ और ही कहते हैं-
"प्यार में
मन कवि हो जाता है
यह कवि
कविता लिखता नहीं
कविता जीता है..."
इस बात से इत्तेफाक़ रखने वालों की संख्या कुछ ज़्यादा नहीं होगी, इसे यूं समझिए,मॉल्स में घूमते किसी भी जोड़े को देख लीजिए, लड़की ने बाएं हाथ से लड़के के हाथ में हाथ डाल रखा है, गोयाकि प्रेम की जंजीर...
दूसरे हाथ को घुमा-घुमा कर, न जाने, मुस्कुराती हुई वो क्या बता रही है, लड़के का दूसरा हाथ अपने आईपॉड के गाने शफल करने में, ईयर प्लग में चलने वाला गीत, उसके साथ चलती ‘कविता’ (इमरोज के शब्दों में) से कहीं नहीं मिलता।
जितनी जल्दी ये किस्से शुरू होते हैं उतनी ही जल्दी खत्म भी हो रहे हैं, प्रेम अधिकार चाहता है, बिहारी कहते हैं प्रेम एकाधिकार चाहता हैः ‘‘बतरस लालच लाल की, मुरली धरी लुकाय’’, प्रेमिका को श्याम के अधरों पर मुरली का होना भी बर्दाष्त भी नहीं है, तो ये तो आज के राधा-श्याम हैं, हाथों में हाथ है, पर नज़र को कौन रोक सकता है, तन पर अधिकार हो सकता है, मन पर तो नहीं, वो तो वहीं भागता है जहां प्रेम है।
लड़कपन में पहले प्यार का स्वाद चखा था, तो यही बैसाख का महीना था, आज भी जब अमराईयों से बौर की महक उठती है, तो उस प्यार की खुषबू दिल को इक अनजानी सी मिठास से भर देती है, ये बेवफाई नहीं है, अहसास है उस रिश्ते का जिसने आपकी ज़िन्दग़ी में एक नया पाठ जोड़ा था... प्यार का।
इमरोज लिखते हैं-
अमृता मुझे कई नामों से बुलाती है/ दोस्ती के ज़माने में/ रेडियो स्टेशन स्कूटर पर जाती/ वह बाएं हाथ से मुझसे लिपटी रहती/ और दाएं हाथ से कभी-कभी/ मेरी पीठ पर कुछ लिखती रहती/ एक दिन पता लगा/ वह साहिर-साहिर लिखती है...
मनचाही पीठ पर मनचाहा नाम
मुझे साहिर भी अपना नाम ही लगा
कितने और होंगे ऐसे, जो साहिर को अपना नाम मान सकें, अमृता-इमरोज, सुधा-चंदर जैसा प्यार कहीं इतिहास की बात न बन जाएं।
कहां है वो चंदर जो कह सके, ‘सुधा, प्रेम इंसान को ऊपर उठाता है, नीचे नहीं गिराता।’
है कहीं वो पागल शायर जो कह सके,
‘खुश रहे या बहुत उदास रहे
ज़िन्दगी, तेरे आस-पास रहे।’
interesting, Poetry : Hindi Kavita, English Poems, Urdu Shayari & Punjabi Poetry
ReplyDelete