आजकल न जाने क्या हो गया है...लाइफ में कोई रंग ही नहीं रह गया..ब्लैक एंड व्हाइट भी नही..मटमैला सा कोई रंग है..कहीं कुछ नहीं दिख रहा है...रोज़ डेस्कटॉप के themes और वॉलपेपर्स बदलती हूँ..कुछ तो मन बदले,google chrome ने और अच्छा ऑप्शन दे दिया है,लाखों themes का ,पर मन का कोई theme option नहीं है
कभी कभी लगता है,कहीं कुछ नहीं है..सब कुछ वीरान सा है..
ग़ालिब का एक शेर है,सही से याद नहीं आ रहा पर कुछ यूँ है...
"वीरानी सी वीरानी है
दश्त को देखकर घर याद आ गया... "
पर ये घर की याद तो नहीं है....
कभी कभी,अमूमन हम सभी के साथ होता है कि कुछ रोज़ ऐसे होते हैं जब लगता है किस्मत हमारे साथ नहीं है..पाला बदल कर सामने जा खड़ी हुई है और हमारी हर इक ठोकर और चोट पर हँस रही है...मुझे तो कई बार खिल्ली उड़ाती हुई भी लगी है...
अब तक जब कभी ऐसा हुआ है तब मैं उसकी हँसी कि आवाज़ कि दुगुनी ताक़त से उठ खड़ी हुई..पर न जाने इस बार क्या हुआ है..मैं demotivated feel कर रही हूँ..
कई बार लोगों को कहते सुना है कि 'हमारा समय खराब है या ग्रह ठीक नहीं हैं',मुझे इन सब पर विश्वास नहीं है..सब आप के सोचने का नजरिया है...आप के साथ वही होता है जो आप चाहते हैं...हाँ,कई बातें हमारे बस में नहीं होतीं..पर बेचारे समय या ग्रहों को दोष देना..उनका काम तो बस चलना है...हमें तो उन कि चाल से चाल मिलनी है..
पर आज मेरा भी मन कर रहा है किस्मत और so called बुरे ग्रहों से युद्ध विराम का..
अभी अभी सीढ़ियों से गिरे हैं,चोट कोहनी में लगी है..असर दिमाग पर हो रहा है..!!
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